Rajasthan

हनुमानगढ़ में वन विभाग कार्रवाई पर कस्वां की मांग, हजारों परिवार संकट में

हनुमानगढ़ में वन विभाग कार्रवाई पर कस्वां की मांग, हजारों परिवार संकट में

लोकसभा में उठा मुद्दा, हजारों परिवारों के बेघर होने का खतरा
दिल्ली में लोकसभा के नियम-377 के तहत चूरू सांसद Rahul Kaswan ने हनुमानगढ़ में वन विभाग की कार्रवाई से उत्पन्न संकट का मुद्दा उठाया।

उन्होंने कहा कि अचानक और अप्रत्याशित कार्रवाई से हजारों परिवारों के सामने अपने घरों से बेदखल होने का खतरा खड़ा हो गया है।


वर्षों से बसे परिवारों पर संकट

सांसद के अनुसार, जिन लोगों ने वर्षों से मेहनत कर अपने घर बनाए और जीवन बसाया, अब उन्हें नोटिस देकर मकान अवैध बताए जा रहे हैं।

“यह केवल प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय का सवाल है।”


1979 के आदेश पर उठे सवाल

जांच में सामने आया कि 15 मार्च 1979 को तत्कालीन जिला कलेक्टर द्वारा करीब 20 हजार बीघा भूमि को वन एवं गोचर घोषित कर दिया गया था।

सांसद ने कहा कि:

  • स्थानीय जनप्रतिनिधियों से कोई परामर्श नहीं लिया गया
  • निवासियों को सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया

विकास कार्यों से बसी आबादी का प्रमाण

पिछले दशकों में इस क्षेत्र में:

  • बिजली कनेक्शन
  • पानी की व्यवस्था
  • प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान
  • सड़क निर्माण

जैसे कार्य हुए हैं, जो यह साबित करते हैं कि यह क्षेत्र वास्तव में आबादी क्षेत्र बन चुका है


2025 में अचानक नोटिस से बढ़ा संकट

वर्ष 2025 में वन विभाग द्वारा अचानक नोटिस जारी कर मकान खाली करने के आदेश दिए गए, जिससे क्षेत्र में:

  • भय
  • असमंजस
  • आक्रोश

की स्थिति बन गई है।


सरकार से कस्वां की प्रमुख मांगें

Rahul Kaswan ने सरकार से मांग की:

  • भूमि की निष्पक्ष पुनः पैमाइश कराई जाए
  • जहां आबादी बस चुकी है, उसे वन/गोचर श्रेणी से अलग किया जाए
  • बिना वैकल्पिक समाधान किसी को बेदखल न किया जाए
  • प्रभावित परिवारों के लिए मानवीय नीति बनाई जाए

“यह केवल जमीन नहीं, जीवन का सवाल”

सांसद ने कहा कि यह मामला केवल भूमि का नहीं, बल्कि हजारों परिवारों के जीवन, सम्मान और भविष्य से जुड़ा हुआ है।

उन्होंने सरकार से संवेदनशीलता दिखाते हुए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।

Source link

Leave a response —

Your email address will not be published. Required fields are marked *