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Jhunjhunu News in Hindi, Live Blog : झुंझुनू न्यूज़ Today for 2 मई @Shekhawatilive

Jhunjhunu News in Hindi, Live Blog : झुंझुनू न्यूज़ Today for 2 मई @Shekhawatilive

झुंझुनूं जिले के बदनगढ़ गांव में एक अनोखा आयोजन देखने को मिला, जहां पीपल वृक्ष और शालिग्राम जी का विवाह पूरे विधि-विधान से सम्पन्न हुआ।

गांव का माहौल पूरी तरह शादी समारोह जैसा नजर आया। आधा गांव बाराती बना तो आधे गांव ने पारंपरिक स्वागत किया।


70 साल पुरानी परंपरा फिर हुई जीवंत

ग्रामीणों के अनुसार, करीब 70 वर्ष पहले भी ऐसा आयोजन हुआ था। अब एक बार फिर इस परंपरा को जीवित कर नई पीढ़ी के सामने सांस्कृतिक विरासत प्रस्तुत की गई।


पर्यावरण संरक्षण बना मुख्य उद्देश्य

इस आयोजन के मुख्य यजमान ओमप्रकाश शर्मा और उनकी पत्नी सरोज शर्मा रहे।

ओमप्रकाश शर्मा ने बताया:
“यह पीपल का वृक्ष मेरे पिता स्वर्गीय हेमराज शर्मा ने लगाया था। उनकी इच्छा थी कि इसका विवाह कराया जाए।”

उन्होंने आगे कहा,
“यह आयोजन केवल धार्मिक नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने का माध्यम है।”


विवाह की हर रस्म निभाई गई परंपरागत तरीके से

इस अनोखे विवाह में सभी पारंपरिक रस्में निभाई गईं:

  • भात और बारात का स्वागत
  • वरमाला और गणेश पूजन
  • कन्यादान और सात फेरे
  • विदाई समारोह

महिलाओं ने मंगल गीत गाए, जबकि युवाओं ने बारात में नृत्य कर माहौल को उत्सवमय बना दिया।


हजारों लोगों की मौजूदगी

इस आयोजन में हजारों ग्रामीणों के साथ आसपास के गांवों से भी लोग पहुंचे।

हर गली और चौपाल पर इसी विवाह की चर्चा रही। लोगों ने इसे अपने जीवन का अनोखा अनुभव बताया।


बुजुर्गों की खास भागीदारी

गांव के बुजुर्गों ने पूरे आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

बारात निकलते ही बुजुर्गों ने आतिशबाजी कर खुशी जताई और व्यवस्थाओं को संभाला। उनकी सक्रिय भागीदारी ने कार्यक्रम को और खास बना दिया।


विद्वान आचार्यों के सानिध्य में हुआ आयोजन

इस विवाह को वैदिक विधि से सम्पन्न कराने में

  • डॉ. कैलाश चतुर्वेदी (प्रधान आचार्य)
  • पंडित यशपाल शास्त्री
  • कुलदीप शास्त्री
  • दीपक शास्त्री

का विशेष योगदान रहा।


जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की प्रतिक्रिया

मुकेश दाधीच (भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष) ने कहा:
“यह आयोजन पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरणादायक है।”

ग्रामीण बुजुर्ग विद्याधर शर्मा बोले:
“ऐसा आयोजन जीवन में बहुत कम देखने को मिलता है। यह हमारी संस्कृति का जीवंत उदाहरण है।”

डॉ. मधुसूदन मालानी ने कहा:
“प्रकृति को पूजनीय मानने की भारतीय परंपरा इस आयोजन में साफ झलकती है।”


सामाजिक और सांस्कृतिक संदेश

यह आयोजन केवल धार्मिक नहीं, बल्कि एक सामाजिक संदेश बनकर उभरा।

गांव ने यह दिखाया कि पेड़-पौधों को देवतुल्य मानकर उनकी रक्षा करना हमारी जिम्मेदारी है।

बदनगढ़ का यह अनूठा विवाह आने वाले समय में भी लोगों को संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रेरित करता रहेगा।

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